BSF के 12वीं पास रसोइये का शातिर कारनामा, नौकरी छोड़कर बना करोड़पति, कर डाला 100 करोड़ का घोटाला

 

जोधपुर से पकड़ा गया शातिर ठग ओमाराम उर्फ राम मारवाड़ी अब तक कई कंपनियां बना चुका है.

जोधपुर. 100 करोड़ रुपये के चिटफंड घोटाले (Chit fund scam) के मामले में दिल्ली की क्राइम ब्रांच ने जोधपुर निवासी ओमाराम उर्फ राम मारवाड़ी (Omaram alias Ram Marwari) को गिरफ्तार किया है. दिल्ली क्राइम ब्रांच आरोपी से पूछताछ कर रही है. इस चिटफंड कंपनी और आरोपी ओमाराम समेत उसके सहयोगियों के खिलाफ जोधपुर जिले में भी करीब चार मामले दर्ज हैं. महज 12वीं तक पढ़ाई करने वाला ओमाराम पहले बीएसएफ में रसोइया था. उसके बाद उसके दिमाग में रुपये कमाने का फितूर चढ़ा तो उसने नौकरी छोड़कर अपनी कंपनी खोल ली.

ओमाराम (38) ने बाद में सैंकड़ों लोगों को बेवकूफ बनाते हुये एक के बाद एक कई कंपनियां खड़ी कर डाली. आखिरकार ओमाराम का खेल उस वक्त खत्म हो गया जब वह दिल्ली क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गया. अब जोधपुर पुलिस भी इस मामले में ओमाराम को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर पूछताछ करेगी. ओमाराम जोधपुर के बालेसर इलाके के गोपालसर गांव का रहने वाला है.

2007 में जयपुर में एक सिक्योरिटी एजेंसी शुरू की
ग्रामीण एसपी अनिल कयाल ने बताया कि ओमाराम ने 12वीं तक पढ़ाई करने के बाद साल 2004 में बीएसएफ को ज्वॉइन किया था. वह बीएसएफ में खाना बनाने का काम करता था. लेकिन उसे यह नौकरी रास नहीं आई. करोड़पति बनने की हसरत पाले ओमाराम ने साल 2007 में जयपुर में एक सिक्योरिटी एजेंसी शुरू की. उसकी यह एजेंसी चल पड़ी. बाद में उसने एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी को अपनी कंपनी बेच दी और खुद उसमें एजेंट के रूप में काम करने लग गया.2008 तक करीब डेढ़ करोड़ रुपये की कमाई कर डाली

इस काम के जरिये आरोपी ने साल 2008 तक करीब डेढ़ करोड़ रुपये की कमाई कर ली. इसके बाद भी ओमाराम का मन नहीं भरा तो उसने एक नई कंपनी शुरू की. उसने सिक्योरिटी एजेंसी का नाम मिताशी मार्केटिंग एंड कंसलटेंसी प्राइवेट लिमिटेड रखा. ओमाराम इस कंपनी में खुद मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर आसीन हुआ. इसके साथ ही इस कंपनी के बोर्ड में बतौर चेयरपर्सन विजेंद्र सिंह को, अतिरिक्त निदेशक के तौर पर डीसी यादव और मदन मोहन मीणा को भी ज्वॉइन करवाया.

नेटवर्किंग सिस्टम से करोड़ों का घोटाला किया
इस टीम ने कंपनी में नेटवर्किंग सिस्टम का प्रयोग शुरू किया. कंपनी से जुड़ने वाले व्यक्ति से 4000 रुपये बतौर चंदा/ सदस्यता शुल्क के नाम पर वसूला जाता था. इसके बदले नए ज्वाइन करने वाले व्यक्ति को 400 रुपये का सफारी सूट का कपड़ा दिया जाता. ओमाराम और उसकी टीम ने कंपनी में चैन सिस्टम चलाकर करीब 100 करोड़ रुपये का घोटाला कर डाला.

मध्य प्रदेश के कई बड़े व्यापारियों को ठगा
दिल्ली क्राइम ब्रांच को पूछताछ के दौरान जानकारी मिली है कि ओमाराम ने नई दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी चिटफंड कंपनियां और ई-कॉमर्स कंपनियां शुरू कर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है. साल 2011 में ओमाराम के खिलाफ राजस्थान में कई मामले दर्ज हुए. उसके बाद वह राजस्थान छोड़कर भाग गया और मध्य प्रदेश के इंदौर में जाकर रहने लगा. वहां भी उसने अपने फर्जीवाड़े के खेल को अंजाम देना शुरू कर दिया. इंदौर में अपने आपको उसने राम मारवाड़ी के नाम से प्रचारित किया और मध्य प्रदेश के कई बड़े व्यापारियों को ठग लिया.

दिल्ली में ई-कॉमर्स का कारोबार शुरू किया
उसके बाद वहां से भागकर साल 2014 में दिल्ली आ गया. ओमराम की हसरतें यहीं पर खत्म नहीं हुई. उसने दिल्ली में प्रॉपर्टी डीलर का काम शुरू किया. दिल्ली के नफसगढ़ इलाके में साल 2018 में उसने कैशबैक बाजार नाम से एक ई-कॉमर्स का कारोबार शुरू किया. फिर वहां फर्जीवाड़ा करने लगा. उसके बाद उसने फिर से साल 2021 में मध्यप्रदेश के इंदौर में जाकर अपना कार्ट नाम की एक और कंपनी शुरू की और सैकड़ों लोगों को ठगा.

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